उत्तराखंड: एलटी शिक्षकों को टीईटी से राहत दिलाने की उठी मांग, सुमित हृदयेश ने किया समर्थन
हल्द्वानी में शिक्षक संघ ने विधायक सुमित हृदयेश से टीईटी की बाध्यता खत्म करने की मांग की। शिक्षकों के हक में उठी आवाज़।
उत्तराखंड: एलटी शिक्षकों को टीईटी से राहत दिलाने की उठी मांग
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हल्द्वानी में, राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड, नैनीताल के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की समस्याओं को विधायक के समक्ष रखना था। इस दौरान, शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने विधायक को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें उनकी प्रमुख मांग एलटी शिक्षकों के लिए टीईटी (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) की बाध्यता को खत्म करना था।
क्या है टीईटी की बाध्यता?
टीईटी, शिक्षकों के लिए एक अनिवार्य परीक्षा है, जिसे पास करना उनके लिए जरूरी है ताकि वे सरकारी स्कूलों में पढ़ा सकें। लेकिन, एलटी शिक्षकों का मानना है कि यह परीक्षा कई बार उनके लिए एक बाधा बन जाती है। शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह परीक्षा उनके समर्पण और क्षमता का सही आकलन नहीं करती।
सुमित हृदयेश का समर्थन
विधायक सुमित हृदयेश ने शिक्षकों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि वे किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने देंगे। उन्होंने बताया कि वह इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाएंगे और शिक्षकों के हक में उचित निर्णय लेने की कोशिश करेंगे।
शिक्षकों की अन्य समस्याएं
ज्ञापन में शिक्षकों ने अन्य कई मुद्दों का भी उल्लेख किया, जैसे कि वेतन वृद्धि, कार्य के घंटे और अन्य संबंधित समस्याएं। शिक्षक संघ ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में पीछे नहीं हटेंगे।
निष्कर्ष
शिक्षकों का यह संघर्ष केवल उनके अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए भी आवश्यक है। यदि एलटी शिक्षकों को टीईटी से राहत मिलती है, तो यह न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे शिक्षा क्षेत्र के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हमें उम्मीद है कि विधायक सुमित हृदयेश इस मामले को गंभीरता से लेंगे और शिक्षकों को न्याय दिलाने में मदद करेंगे।
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