उत्तराखंड: कण्वाश्रम पर लिखी गई किताब को मिला देश में पहला पुरस्कार
उत्तराखंड के कण्वाश्रम पर आधारित पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर पहला पुरस्कार मिला है। यह उपलब्धि कोटद्वार की ऐतिहासिक विरासत को पहचान दिलाती है।
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कण्वाश्रम की ऐतिहासिक विरासत को मिली पहचान
कोटद्वार: उत्तराखंड के कोटद्वार और कण्वाश्रम की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। हाल ही में प्रकाशित 'कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष' शीर्षक वाली पुस्तक को देशभर में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार ने कोटद्वार और पूरे उत्तराखंड में खुशी का माहौल बना दिया है।
विधानसभा अध्यक्ष का बयान
इस खास अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण ने कहा, "यह पुरस्कार केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर की पहचान नहीं है, बल्कि यह हमें आगे बढ़ने का भी प्रोत्साहन देता है। इस पुस्तक के माध्यम से हमने कण्वाश्रम की अद्भुत विरासत को उजागर किया है।"
लेखक की मेहनत रंग लाई
पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक मनोज ईष्टवाल ने कहा, "यह पुरस्कार हमारे लिए गर्व की बात है। हमें उम्मीद है कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को कण्वाश्रम की महत्ता और उसके इतिहास से अवगत कराएगी।" इस पुस्तक में कण्वाश्रम की ऐतिहासिकता, उसकी धार्मिक महत्वता और सांस्कृतिक धरोहर का विस्तृत वर्णन किया गया है।
कोटद्वार की सांस्कृतिक धरोहर
कोटद्वार, जो उत्तराखंड का एक प्रमुख शहर है, अपनी ऐतिहासिक धरोहर के लिए जाना जाता है। कण्वाश्रम का नाम भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है। यह स्थल न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
उपसंहार
इस पुस्तक को मिलने वाला पुरस्कार न केवल उत्तराखंड के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह हम सभी के लिए एक प्रेरणा है कि हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखें और उसे आने वाली पीढ़ियों को सौंपें।
इस उपलब्धि पर हम सभी को गर्व होना चाहिए और हमें आगे भी ऐसे प्रयासों को समर्थन देना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए, कृपया हमारी वेबसाइट पर जाएं: https://avpganga.com
लेखिका: टीम avpganga
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