उत्तराखंड में चुनाव आयोग ने 17 निष्क्रिय राजनीतिक पार्टियों को सूची से हटाया
उत्तराखंड में चुनाव आयोग ने 17 निष्क्रिय राजनीतिक पार्टियों को हटाया है, जिससे वे आगामी विधानसभा चुनावों में भाग नहीं ले सकेंगी। भाजपा और कांग्रेस चुनावी तैयारी में जुटी हैं।
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उत्तराखंड में चुनाव आयोग का बड़ा फैसला
देहरादून, 4 अगस्त: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के साथ, चुनाव आयोग ने 17 ऐसी राजनीतिक पार्टियों को उनकी सूची से हटा दिया है जो लंबे समय से निष्क्रिय थीं। इन पार्टियों को अगले चुनाव में भाग लेने से रोका गया है, जो अगले वर्ष होने वाले हैं।
भाजपा और कांग्रेस पहले से ही चुनावी लड़ाई की तैयारी कर रही हैं, जबकि मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कार्यालय भी प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में जुटा हुआ है। इस हटाने के साथ ही, छह नई पार्टियों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया है। खानपुर के स्वतंत्र विधायक उमेश कुमार ने भी अपनी जन निर्माण पार्टी को चुनाव आयोग में औपचारिक रूप से पंजीकृत कराया है।
निष्क्रिय पार्टियों की सूची
याद रहे कि चुनाव आयोग हर विधानसभा चुनाव से पहले उन राजनीतिक दलों को नोटिस जारी करता है जो लंबे समय से निष्क्रिय हैं और उन्हें आगामी चुनावों में भाग लेने से प्रतिबंधित करता है। इस बार, 17 पार्टियों को हटाया गया है जो पिछले छह वर्षों से किसी भी चुनाव में भाग नहीं ले रही थीं। जांच में यह भी पाया गया कि इन पार्टियों के द्वारा पंजीकृत पते अब मान्य नहीं हैं। 2022 में, उत्तराखंड में 42 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियां थीं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, कई हटाई गई पार्टियों ने समय पर वार्षिक रिपोर्ट, योगदान रिपोर्ट या आंतरिक चुनाव आयोजित करने में विफलता दिखाई। उन्हें अपनी स्थिति साबित करने के लिए नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन किसी भी पार्टी ने संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। अंततः, आयोग ने केंद्रीय चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेजी, जिसने उनकी सूची से हटाने का आदेश दिया।
हटाई गई पार्टियों की सूची
इन 17 पार्टियों में शामिल हैं: भारतीय जनक्रांति पार्टी, हमारी जनमंच पार्टी, मैदानी क्रांति दल, राष्ट्रीय जन सहायता दल, उत्तराखंड जन शक्ति पार्टी, भारतीय मूल निवासी समाज पार्टी, भारतीय अंत्योदय पार्टी, भारतीय ग्राम नगर विकास पार्टी, गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट, राष्ट्रीय ग्राम विकास पार्टी, भारत कौमी दल, पीपुल्स पार्टी, भारत परिवार पार्टी, भारतीय सम्राट सुभाष सेना, प्रजामंडल पार्टी, प्रजातंत्र पार्टी ऑफ इंडिया और सूरज सेवा दल।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन पार्टियों से जुड़े नेता इन हटाई गई पार्टियों के बैनर के तहत चुनाव नहीं लड़ सकते हैं, जबकि नए आवेदकों की पंजीकरण से पहले प्रक्रियागत जांच की जाएगी।
निष्कर्ष
यह कदम चुनाव आयोग की ओर से एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे राजनीतिक प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकेगा। निष्क्रिय पार्टियों के हटने से चुनावी मैदान में स्पष्टता आएगी और नए दलों के लिए अवसर पैदा होंगे। आगे के अपडेट के लिए, कृपया यहाँ क्लिक करें।
यह निर्णय आगामी चुनावों के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रदान करेगा और यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और कांग्रेस इस स्थिति का कैसे सामना करती हैं।
इस प्रकार, चुनाव आयोग का यह निर्णय उत्तराखंड की राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
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