थानो में मस्जिद सीलिंग के खिलाफ Muslims का विरोध प्रदर्शन

थानो में मस्जिद के सीलिंग के खिलाफ मुस्लिम सेवा संगठन ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। मस्जिद के सीलिंग को लेकर समुदाय में आक्रोश है।

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थानो में मस्जिद सीलिंग के खिलाफ Muslims का विरोध प्रदर्शन

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लेखिका: साक्षी शर्मा, प्रिया वर्मा, नेहा यादव
टीम AVP Ganga

थानो में मस्जिद सीलिंग पर मुस्लिम समुदाय का विरोध

देहरादून, 5 जून: उत्तराखंड के थानो में मुस्लिम सेवा संगठन के सदस्यों ने आज जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर एक विरोध मार्च निकाला। इसका मुख्य कारण वहां की मस्जिद का हाल ही में सील होना है। इस कार्रवाई को लेकर समुदाय में आक्रोश है, और उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाया है।

प्रदर्शन का कारण

मस्जिद के सील होने से नाराज संगठन के सदस्यों ने मुस्लिम समुदाय को एकत्रित किया और पहले STF कार्यालय के बाहर जमा हुए, फिर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर बढ़े। उनका आरोप है कि सभी आवश्यक दस्तावेज होने के बावजूद मस्जिद को सील किया गया। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

मस्जिद सीलिंग का इतिहास

यह उल्लेखनीय है कि कंडोगल और कुदियाल गांवों में स्थित जामा मस्जिद और मदरसा को हाल ही में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) द्वारा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में सील किया गया। स्थानीय निवासियों द्वारा पहले प्रशासन और MDDA में मस्जिद के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। काली सेना और बजरंग दल जैसी समूहों ने भी मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

स्थानीय निवासियों की शिकायतें

मस्जिद के पहले मंजिल को 17 दिसंबर पिछले साल सील किया गया था, जबकि ग्राउंड फ्लोर को कुछ दिन पहले सील किया गया। काली सेना, बजरंग दल और स्थानीय निवासियों का कहना है कि मस्जिद का उत्तराखंड वक्फ बोर्ड या मदरसा बोर्ड के साथ पंजीकरण नहीं है। ये आरोप विभागीय जांच में भी पुष्टि किए गए थे, जिसके बाद मस्जिद का ग्राउंड फ्लोर और फिर पहले मंजिल को सील किया गया।

स्थिति की गंभीरता

घटना ने क्षेत्र में तनाव को बढ़ा दिया है, और प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं, जो बढ़ती मांगों और प्रदर्शनों के जवाब में होगी।

निष्कर्ष

यह मामला न केवल स्थानीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह धार्मिक और सामाजिक सामंजस्य पर भी प्रभाव डाल सकता है। प्रशासन को इस स्थिति को संभालने के लिए संवेदनशीलता और उचित उपाय करने की आवश्यकता है।

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