टैरिफ लागू होते ही शेयर बाजार में कोहराम, सेंसेक्स में 806 और निफ्टी 50 में 182 अंकों की भारी गिरावट
गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 805.58 अंकों की गिरावट के साथ 75,811.86 अंकों पर खुला। वहीं दूसरी ओर, एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स भी 182.05 अंकों के नुकसान के साथ 23,150.30 अंकों पर खुला।

टैरिफ लागू होते ही शेयर बाजार में कोहराम, सेंसेक्स में 806 और निफ्टी 50 में 182 अंकों की भारी गिरावट
AVP Ganga
लेखिका: प्रिया शर्मा, टीम नेटानागरी
परिचय
शेयर बाजार में हाल ही में लागू हुए नए टैरिफों ने निवेशकों के बीच हड़कंप मचा दिया है। बीते दिन बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली जब सेंसेक्स ने 806 अंकों की गिरावट का सामना किया और निफ्टी 50 में भी 182 अंकों की कमी आई। यह घटनाक्रम केवल वित्तीय क्षेत्र ही नहीं, बल्कि समस्त अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर भी गहरा असर डाल सकता है।
टैरिफ का प्रभाव
सरकार द्वारा लागू किए गए नए टैरिफों का मुख्य उद्देश्य घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना था, लेकिन इससे निर्यातक और निवेशक निराश हैं। इस नीति के चलते वस्त्र, धातु, और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों पर भारी शुल्क लगाया गया है, जिससे विदेशी कंपनियों की लागत बढ़ गई है। ऐसे में बाजार में अनिश्चितता और तनाव बढ़ गया है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट बाजार के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
बाजार की प्रतिक्रिया
बाजार की प्रतिक्रिया बेहद नकारात्मक रही। सेंसेक्स जहां 806 अंकों की गिरावट के साथ 58,512 पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी 50 भी 182 अंक गिरकर 17,301 पर पहुंच गया। कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में 5-10% की गिरावट दर्ज की गई, जिसमें टाटा स्टील और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े नाम शामिल हैं। निवेशकों की बेचैनी को ध्यान में रखते हुए, विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले दिनों में बाजार में और भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
किस तरह मात देंगे निवेशक?
यह स्थिति सामान्य निवेशक के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। लेकिन कुछ स्मार्ट निवेशक इस अवसर को बढ़िया निवेश का मौका देख रहे हैं। वे अपने पोर्टफोलियो में रिव्यू कर जोखिम संचालकों के शेयरों का चयन कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, संकट का सामना करने के लिए सतत रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
शेयर बाजार में हालिया गिरावट ने निवेशकों के लिए अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं। जबकि कुछ इसे एक अस्थायी झटका मान रहे हैं, अन्य इसे एक दीर्घकालिक समस्या के रूप में देख रहे हैं। टैरिफ के प्रभाव के बावजूद, सही निवेश रणनीति अपनाकर निवेशक किसी भी संकट का सामना कर सकते हैं। आगे की रणनीतियों के साथ, लगातार बाजार पर नज़र रखना आवश्यक है।
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