हरित क्रांति का संकल्प: हरेला पर पौधारोपण अभियान

हरित क्रांति के समर्थन में 'सद्भावना मसूरी' द्वारा हरेला के अवसर पर पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

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हरित क्रांति का संकल्प: हरेला पर पौधारोपण अभियान

हरित क्रांति का संकल्प: हरेला पर पौधारोपण अभियान

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लेखिका: राधिका शर्मा

मसूरी, 22 जुलाई: हरेला के अवसर पर, सामाजिक संगठन 'सद्भावना मसूरी' ने हतिपौन क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के संदेश को फैलाने के लिए एक पौधारोपण अभियान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में लगभग 25 विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए और उनकी सुरक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम का संचालन

यह कार्यक्रम सद्भावना के अध्यक्ष सुरेश गोयल के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें समन्वयक अनिल गोयल और जसबीर कौर ने नेतृत्व किया। सद्भावना के सदस्यों ने इस पौधारोपण अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।

जसबीर कौर का संदेश

जसबीर कौर ने इस अवसर पर कहा कि हरेला केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारी प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने पर्यावरण असंतुलन, बढ़ती तापमान और प्राकृतिक आपदाओं की चिंता जताई। उन्होंने कहा, "अगर हम आज पेड़ों और प्रकृति की रक्षा नहीं करते, तो आने वाली पीढ़ियाँ गंभीर संकट का सामना कर सकती हैं।"

उन्होंने सबको प्रेरित किया कि वे अपने घरों, आंगनों या पड़ोस में कम से कम एक पौधा लगाएं और उसकी देखभाल करें। जसबीर कौर ने कहा कि मसूरी जैसे पर्यटन स्थल की पहचान उसकी हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता में है। एक सुरक्षित पर्यावरण न केवल पर्यटन को मजबूत करता है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करता है।

सामुदायिक सहभागिता

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संगठनों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। पौधारोपण के अलावा, जल संरक्षण और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इस अवसर पर सद्भावना के कई सदस्य उपस्थित थे, जिनमें संतोष आर्य, भरोसी रावत, रुबिना, अंजुम, अनुज स्टाइल, संदीप अग्रवाल, अतुल अग्रवाल, शिव कुमार, राजीव अग्रवाल, और विजयलक्ष्मी कोहली शामिल थे।

निष्कर्ष

इस तरह के आयोजन न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा देते हैं। हरेला जैसे उत्सव हमें यह याद दिलाते हैं कि हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीना चाहिए। आइए हम सभी मिलकर इस हरित क्रांति का हिस्सा बनें और अपने पर्यावरण की रक्षा करें।

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