2030 से पहले ही 9 लाख करोड़ रुपये के सालाना एक्सपोर्ट टार्गेट को पा लेगा टेक्सटाइल सेक्टर, PM मोदी ने कही बड़ी बात
पीएम मोदी ने कहा कि ‘भारत टेक्स’ एक बड़ा वैश्विक आयोजन बन रहा है, जिसमें 120 से अधिक देश भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत उच्च गुणवत्ता वाले कार्बन फाइबर के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

2030 से पहले ही 9 लाख करोड़ रुपये के सालाना एक्सपोर्ट टार्गेट को पा लेगा टेक्सटाइल सेक्टर, PM मोदी ने कही बड़ी बात
AVP Ganga
लेखिका: साक्षी शर्मा, टीम नेटानागरी
परिचय
भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यह क्षेत्र 2030 से पहले 9 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक निर्यात लक्ष्य प्राप्त कर लेगा। इस आशाजनक भविष्यवाणी ने पूरे उद्योग को उमंगित कर दिया है। आइए जानते हैं कि भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को इस दिशा में कैसे बढ़ावा मिलेगा और संभावित चुनौतियों का सामना कैसे किया जा सकता है।
टेक्सटाइल क्षेत्र का महत्व
भारतीय अर्थव्यवस्था में टेक्सटाइल उद्योग का एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह न केवल लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है, बल्कि विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत दुनिया में दो सबसे बड़े कपड़ा उत्पादकों में से एक है। इस क्षेत्र में विकास के लिए निर्यात बढ़ाना आवश्यक है।
PM मोदी का दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में टेक्सटाइल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए विभिन्न उपायों की आवश्यकता को बारीकी से समझाया। उन्होंने कहा कि भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों की गुणवत्ता और डिज़ाइन में सुधार लाने के लिए सरकार और उद्योग को सामूहिक रूप से काम करना होगा। साथ ही, उन्होंने डिजिटल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवीनतम तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया।
2020-2030: विकास की योजना
सरकार ने टेक्सटाइल क्षेत्र को विकसित करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी विभिन्न योजनाएँ शुरू की हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र ने काफी विकास किया है। अब 2030 तक 9 लाख करोड़ रुपये के एक्सपोर्ट टार्गेट को प्राप्त करने के लिए विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए, छोटे व मध्यम उद्योगों को भी साथ में लाकर और नई तकनीकों का समावेश करके विकास की चलाई होगी।
चुनौतियाँ और समाधान
हालाँकि यह लक्ष्य वांछनीय है, लेकिन इस दिशा में कई चुनौतियाँ भी हैं। प्रतिस्पर्धा, उत्पादन लागत, और वैश्विक बाजार की अस्थिरता जैसे मुद्दे इसके अड़चन बन सकते हैं। इसके समाधान के लिए, उद्योग को आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना होगा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए अपनी उत्पादन विधियों में सुधार करना होगा।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह आश्वासन कि टेक्सटाइल सेक्टर 2030 से पहले 9 लाख करोड़ रुपये के सालाना एक्सपोर्ट लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा, इस क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इसका मतलब है कि हमें इस क्षेत्र में निवेश करने और इसे वैश्विक बाजार में बढ़ावा देने के लिए प्रयास जारी रखना होगा। सभी stakeholders को मिलकर काम करना होगा ताकि यह भविष्यवाणी साकार हो सके।
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