चातुर्मास का आगाज़: 25 जुलाई से मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम
25 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत हो रही है, जिसमें सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लगेगा। जानिए इसके महत्व और इसे लेकर क्या तैयारियां करनी हैं।
चातुर्मास का आगाज़: 25 जुलाई से मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम
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हरिद्वार: 25 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत होने जा रही है। यह समय हर साल विशेष धार्मिक महत्व रखता है। देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसके चलते विवाह, उपनयन, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों पर कुछ समय के लिए विराम लग जाता है। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान और साधना का विशेष महत्व होता है।
चातुर्मास का महत्व
हिंदू धर्म में चातुर्मास का एक विशेष स्थान है। इसे चार महीने का एक पवित्र समय माना जाता है, जिसमें भक्तजन अधिकतर उपवास, साधना और भक्ति में लिप्त रहते हैं। इस अवधि में भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस समय के दौरान कई शुभ मुहूर्त होते हैं, लेकिन चातुर्मास के दौरान मांगलिक कार्यों को करने से बचना चाहिए।
योजनाओं पर विराम
जो लोग इस समय के दौरान विवाह या अन्य मांगलिक कार्यों की योजना बना रहे थे, उन्हें अब अगले शुभ मुहूर्त का इंतजार करना होगा। कई परिवार पहले से ही अपनी तैयारियों में जुटे थे, लेकिन अब उन्हें अपनी योजनाओं को स्थगित करना पड़ेगा।
संवेदनशीलता और श्रद्धा
धार्मिक आस्थाओं के अनुसार, इस समय को श्रद्धा और संवेदनशीलता के साथ मनाना चाहिए। भक्तजन इस दौरान अधिकतर साधना में लिप्त रहकर अपनी आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ते हैं। चातुर्मास का पालन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
अंत में
इस चातुर्मास में भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए भक्तजन अपने कार्यों में संयम बरतते हैं और उनकी आराधना करते हैं। यह समय न केवल धार्मिक कार्यों के लिए, बल्कि आत्मिक शांति और एकता की भावना को बढ़ावा देने का भी अवसर है।
इस चातुर्मास में आप अपने लिए और अपने परिवार के लिए शुभ कार्यों की योजना बना सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि इस समय मांगलिक कार्यों को स्थगित करना आवश्यक है।
लेखिका: प्रिया शर्मा, सुष्मिता वर्मा, टीम avpganga
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