देहरादून: मुस्लिम समुदाय ने की गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग, बकरीद पर जारी की एडवाइजरी

देहरादून: आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) को लेकर जमीयत उलेमा जिला देहरादून ने मुस्लिम समाज से कानून, शरई हिदायतों और सामाजिक सौहार्द का पालन करते हुए कुर्बानी करने की अपील की है। संगठन ने उत्तराखंड से गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिलाने के लिए प्रदेशव्यापी मुहिम चलाने का भी ऐलान किया है। गुरुवार को आज़ाद कॉलोनी […] The post देहरादून: मुस्लिम समुदाय ने की गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग, बकरीद पर जारी की एडवाइजरी appeared first on Dainik Uttarakhand.

May 23, 2026 - 00:33
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देहरादून: मुस्लिम समुदाय ने की गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग, बकरीद पर जारी की एडवाइजरी
देहरादून: मुस्लिम समुदाय ने की गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग, बकरीद पर जारी की एडवाइजरी

देहरादून: मुस्लिम समुदाय ने की गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग, बकरीद पर जारी की एडवाइजरी

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देहरादून: आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) को लेकर जमीयत उलेमा जिला देहरादून ने मुस्लिम समाज से कानून, शरई हिदायतों और सामाजिक सौहार्द का पालन करते हुए कुर्बानी करने की अपील की है। इस संगठन ने गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिलाने के लिए प्रदेशव्यापी मुहिम चलाने का भी ऐलान किया है।

बकरीद की तैयारियाँ और अपील

गुरुवार को आज़ाद कॉलोनी स्थित मदरसा दार-ए-अरकम में आयोजित बैठक के बाद जारी बयान में जमीयत उलेमा ने कहा कि कुर्बानी इस्लाम का अहम इबादती अमल है, जिसका उद्देश्य केवल अल्लाह की रज़ा हासिल करना है, न कि दिखावा या प्रदर्शन। संगठन ने सभी मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से इस त्योहार का पालन करें।

राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग

जमीयत उलेमा का मानना है कि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने से भारतीय संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। उनका कहना है कि यह मांग उनके धार्मिक और सामाजिक अधिकारों की पहचान करने का एक तरीका है। इस प्रकरण में, लोग संगठित होकर अपनी आवाज़ उठाने का प्रयास कर रहे हैं, जो कि उत्तराखंड की राजनीतिक और सामाजिक धारा में एक नया मोड़ ला सकता है।

सामाजिक सौहार्द का पालन

जमीयत उलेमा ने स्पष्ट किया कि मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए सभी लोगों की जिम्मेदारी है कि ऐसा कोई कार्य न किया जाए जिससे विवाद या तनाव की स्थिति पैदा हो। कुर्बानी केवल निर्धारित और वैध स्थानों पर ही की जाए। सड़क, गली, चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी करने से बचा जाए। इसके साथ ही, प्रशासन और पुलिस द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील भी की गई है।

सफाई व्यवस्था पर जोर

बैठक में सफाई व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया गया। इनकी अपेक्षा है कि कुर्बानी के बाद खून, अवशेष और गंदगी को तुरंत साफ किया जाए। सार्वजनिक स्थानों और नालियों में गंदगी फैलाना कानूनन गलत होने के साथ-साथ इस्लाम की शिक्षाओं के भी खिलाफ है।

अफवाहों से दूर रहने की सलाह

जमीयत उलेमा ने लोगों से अफवाहों, भड़काऊ बातों और उकसावे से दूर रहने की अपील की। साथ ही कहा कि किसी भी विवाद की स्थिति में तुरंत प्रशासन और पुलिस को सूचना दी जाए। नमाज के दौरान इमामों और खतीबों से अमन, भाईचारे और जिम्मेदार सामाजिक व्यवहार का संदेश देने का अनुरोध किया गया है।

निष्कर्ष

बकरीद का त्योहार भाईचारे और सामाजिक सद्भावना का प्रतीक है। ऐसे में इस प्रकार की अपील और दिशा-निर्देश हमें एक स्वस्थ और समायोजित समाज की ओर ले जाने में मदद कर सकते हैं। मुस्लिम समुदाय की यह पहल न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में अवश्यंभावी शांति और सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देती है।

— लेखिका: सिमा शर्मा, राधिका वर्मा, टीम avpganga

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