14 साल की मासूम दुल्हन नौ माह की गर्भवती, प्रसव के दौरान हालत गंभीर, नाबालिग पति पर केस

Child Marriage : 13 साल की उम्र में बाल विवाह का शिकार हुई एक किशोरी को प्रसव पीड़ा होने अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ये सनसनीखेज घटना उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में सामने आई है। प्रसव पीड़ा होने पर उसे परिजन जिला महिला अस्पताल लाए तो दस्तावेज देख डॉक्टर भी चौंक पड़े। बताया जा रहा है कि किशोरी की शादी 13 साल की उम्र में ही कर दी गई थी। दस्तावेजों के अनुसार किशोरी का जन्म साल 2012 में हुआ था।  यहां तक की उसके पति के भी नाबालिग होने की बात सामने आ रही है। किशोरी नौ माह की गर्भवती है। कम उम्र में गर्भवती होने के कारण उसकी तबीयत बिगड़ गई है। उसकी हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। एसआई बबीता टम्टा के मुताबिक किशोरी की शादी 13 साल की उम्र में ही कर दी गई थी।  इधर, चिकित्सकों का कहना है गर्भावस्था का समय पूरा हो चुका है। कभी भी प्रसव हो सकता है। किशोरी चिकित्सकों की देखरेख में है। जच्चा-बच्चा दोनों को सकुशल रखने की पूरी कोशिश है।

Apr 13, 2026 - 09:33
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14 साल की मासूम दुल्हन नौ माह की गर्भवती, प्रसव के दौरान हालत गंभीर, नाबालिग पति पर केस
14 साल की मासूम दुल्हन नौ माह की गर्भवती, प्रसव के दौरान हालत गंभीर, नाबालिग पति पर केस

14 साल की मासूम दुल्हन नौ माह की गर्भवती, प्रसव के दौरान हालत गंभीर, नाबालिग पति पर केस

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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 14 साल की मासूम दुल्हन को प्रसव पीड़ा के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह किशोरी नौ माह की गर्भवती है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। इस मामले ने बाल विवाह के मुद्दे को एक बार फिर से उठाया है।

खबर की संक्षेप में जानकारी

पिता के अनुसार, इस किशोरी का नाम लवी है और यह 13 साल की उम्र में विवाह के बंधन में बंध गई थी। अस्पताल जाने के दौरान डॉक्टरों ने उसकी स्थिति देखकर चौंक उठे। चिकित्सकों ने बताया कि किशोरी की गर्भावस्था का समय पुरा हो चुका है और किसी भी समय प्रसव हो सकता है। इस मामले में उसके नाबालिग पति पर केस दर्ज कर दिया गया है।

नेताओं और समाज के विचार

इस घटना पर विभिन्न समुदायों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सांसदों ने केस को गंभीरता से लिया है और एक बाल विवाह रोकथाम कार्यक्रम की आवश्यकता पर जोर दिया है। समाज में इस तरह के मामलों की रोकथाम करने के लिए जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।

चिकित्सकों की रिपोर्ट

डॉक्टरों का कहना है कि किशोरी की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। उनकी देखभाल करते हुए डॉक्टरों ने हर संभव कोशिश की है ताकि मां-बच्चा सुरक्षित रह सकें। चिकित्सकों ने मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की आवश्यकता व्यक्त की है, ताकि किशोरी इस कठिन समय को बेहतर तरीके से झेल सके।

बाल विवाह की समस्या

पिछले कुछ वर्षों में बाल विवाह की घटनाएं बढ़ी हैं, जो समाज की एक गंभीर समस्या बन गई हैं। किशोरियों का कम उम्र में विवाह होना और गर्भवती होना ना केवल उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह उनके भविष्य को भी प्रभावित करता है। राज्य सरकार और गैर सरकारी संगठन इस समस्या से निपटने के लिए कई योजनाएं बना रहे हैं, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर इसे रोकना अत्यंत आवश्यक है।

हमारा वक्तव्य

इस घटना ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि अगर समाज में बाल विवाह को समाप्त करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं। हमें न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना होगा। यह घटना हमारे लिए एक जंग का संकेत है जहां हमें आवाज उठानी होगी।

इस मामले के आगे की सुनवाई और स्थिति अभी भी जॉच के दायरे में है। समाज और सरकार से उम्मीद है कि इस मामले में उचित कदम उठाए जाएंगे ताकि इस प्रकार के कृत्य रुक सकें।

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