The Common People – Have we Been ‘Trumped’?

By Atul Rawat The other evening, I boarded the famed and ubiquitous Vikram of the Doon ecosystem from Rajpur to Astley Hall. Sitting next to the driver, one is literally on the hot seat — right above the engine. As he expertly navigated the chaotic traffic, I struck up a conversation with him. “Diesel ka […]

May 23, 2026 - 09:33
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The Common People – Have we Been ‘Trumped’?
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The Common People – Have we Been ‘Trumped’?

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लेखिका: Priya Mehta, साक्षी शर्मा, और नंदिनी तिवारी

टीम avpganga

परिचय

हाल ही में, एक अनियंत्रित और भ्रामक आर्थिक स्थिति ने आम नागरिकों को प्रभावित किया है। फिर चाहे वो ऊंची डीजल की कीमतें हों या आवश्यक वस्तुओं की लागत में इजाफा, हर जगह सामान्य लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है। क्या हम सच में ‘ट्रम्प्ड’ हो गए हैं? आइए इस पर विचार करें।

राजपुर से एस्टली हॉल तक की यात्रा

कुछ दिन पहले, मैंने देहरादून के प्रसिद्ध विक्रम से राजपुर से एस्टली हॉल का सफर किया। ड्राइवर की सीट बगल में बैठकर मैंने देखा कि वो किस तरह से हलचल भरे ट्रैफिक में कुशलता से गाड़ी चला रहा था। जब मैंने उससे डीजल की कीमतों के बारे में बात की, तो वह भड़क गया। “डीजल के दाम बढ़ गए हैं, मगर विक्रम के भाड़े में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे तो मेरी कमाई घट रही है,” उसने कहा।

सामान्य जीवन की चुनौतियां

इन दिनों सब कुछ महंगा हो गया है — दूध, रसोई गैस, सब्जियाँ, और यहां तक कि स्कूल की फीस भी। वह चालक कहता है, “क्या करें, काम तो करना ही है। बच्चों और माता-पिता की देखभाल करनी है।” उसकी बातें सुनकर ऐसा महसूस हुआ जैसे वास्तविकता का सामना कर रहा हूं।

अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं का प्रभाव

लेकिन जब मैंने उससे पूछा कि क्या वह जानता है कि अमेरिका का राष्ट्रपति कौन है, तो उसका जवाब सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ। उसने कहा, “मुझे नहीं पता, लेकिन डीजल फिर से महंगा हो गया है।” यह स्पष्ट है कि उसके लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्दे की कोई अहमियत नहीं है। उसकी ज़िंदगी के मुद्दे खुद से ज्यादा समीप हैं।

वैश्वीकरण की सच्चाई

यह कटु सत्य है कि हम सभी वैश्वीकरण का हिस्सा बन चुके हैं। एक व्यक्ति जो कभी भी देहरादून से बाहर नहीं गया, उसके जीवन पर विदेशों में लिए गए फैसलों का असर होता है। यदि कहीं युद्ध छिड़ जाता है, तो तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं, और इसका बुरा असर आम लोगों पर पड़ता है।

आम जनता और अधिकार

इसका सबसे बड़ा नुकसान यही है कि आम लोगों को न तो इन दूर के संघर्षों का पता होता है और न ही उनसे होने वाले प्रभाव का। हम सिर्फ जानते हैं कि हमारी रोजमर्रा की चीजें महँगी हो रही हैं। यही कारण है कि हम अनजान रहकर भी इन संघर्षों का हिस्सा बन जाते हैं।

निष्कर्ष

इसलिए, जब डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इससे न केवल एक विक्रम के चालक को बल्कि हर एक आम व्यक्ति को प्रभावित करती हैं। इसीलिए, हमें इस पर गौर करने की आवश्यकता है कि हम कैसे असमर्थित निपुणता का अनुभव कर रहे हैं। यह आधुनिक अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी त्रासदी है कि आम लोग बिना किसी सहमति के अनजाने में इन संघर्षों का हिस्सा बन जाते हैं।

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