Dramatic brilliance at The Doon School Rose Bowl: Students shine in 5 Hindi plays

From competition to celebration – Alok Ulfat Garhwal Post Bureau  DEHRADUN, 13 May:  The iconic Rose Bowl amphitheatre at The Doon School recently became a vibrant stage for theatrical excellence as students presented five Hindi plays over two evenings. The performances ; Abhimanyu, Aurangzeb, Hanush, Ilham, and Urubhangam — showcased remarkable talent, discipline, and artistic […]

May 14, 2026 - 18:33
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लेखक: सिया शर्मा, पूजा छाबड़ा, और राधिका मेहता, टीम अवप गंगा

इंट्रोडक्शन

देहरादून, 13 मई: द डून स्कूल के प्रतिष्ठित रोज बाउल रंगमंच पर हाल ही में नाटकीय उत्कृष्टता का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। छात्रों ने दो रातों में 5 हिंदी नाटकों का प्रदर्शन किया, जिसमें 'अभिमन्यु', 'औरंगजेब', 'हनुष', 'इल्हाम', और 'उरुभंगम' शामिल थे। इन प्रस्तुतियों ने न केवल उनकी उत्कृष्ट प्रतिभा को प्रदर्शित किया, बल्कि स्कूल समुदाय के भीतर अनुशासन और कलात्मक प्रतिबद्धता को भी उजागर किया।

नाटकीय प्रदर्शन और मूल बातें

इन प्रस्तुतियों में शक्ति से भरी अभिनय, भावनात्मक संगीत, लाइव गान, और उत्कृष्ट ध्वनि एवं प्रकाश व्यवस्था शामिल थी। नाटकों की रचनात्मकता लगभग पूरी तरह से छात्रों द्वारा ही की गई थी, जिसमें शिक्षकों की न्यूनतम भागीदारी थी। सेट डिजाइन से लेकर सूक्ष्म प्रस्तुतियों तक, यह स्पष्ट था कि बच्चों ने अपार मेहनत लगाई है।

उरुभंगम का महत्व

प्रदर्शित नाटकों में प्राचीन संस्कृत त्रासदी 'उरुभंगम' भी थी, जिसे महाकवि भासा के द्वारा लिखा गया है। यह नाटक भारतीय साहित्य के शुरुआती त्रासदियों में से एक माना जाता है और इसमें दुर्योधन के अंतिम क्षणों को गहराई से चित्रित किया गया है। इन जटिल कथाओं का मंचन युवा कलाकारों के लिए आसान नहीं था, फिर भी दोनों नाटकों का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा।

समुदाय का समर्थन

द डून स्कूल समुदाय ने लगभग 250 युवा कलाकारों का समर्थन करने के लिए पूरी ताकत से भाग लिया। पूरा वातावरण न केवल प्रस्तुतियों का स्वागत करने के लिए था, बल्कि स्वतंत्र रचनात्मक प्रयास की आत्मा को भी मनाता था। डॉ. जगप्रीत सिंह, द डून स्कूल के प्रधानाचार्य, ने परंपरागत नाट्य प्रतियोगिताओं को एक बड़े “प्रदर्शन कला के उत्सव” में परिवर्तित करने की इच्छा व्यक्त की, जिससे एक समावेशी और सहयोगी रचनात्मक संस्कृति को बढ़ावा मिले।

शिक्षा में नाट्य कला का महत्व

नाट्य कला को केवल प्रतिस्पर्धा या सम्पूर्णता की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से बच्चों का विकास, उनके आत्मविश्वास, और रचनात्मकता की खोज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन के लिए तैयार करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस संदर्भ में, विद्यालयों में नाटकों का महत्व और बढ़ जाता है।

निष्कर्ष

द डून स्कूल में हुए इस नाट्य उत्सव ने न केवल छात्रों की कौशलता को दर्शाया बल्कि यह भी दिखाया कि इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों को आत्म-खोज और रचनात्मकता के द्वारा कैसे जोड़ा जा सकता है। इसका यह उदाहरण अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणा बन सकता है।

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