सरकार के लिए सिरदर्द बना SGB, कुल देनदारी ₹1.2 लाख करोड़ के पार, ब्याज का खर्च अलग
एसजीबी पर पूछे गए एक सवाल पर सरकार ने संसद को एक लिखित उत्तर में कहा, "20 मार्च, 2025 को 130 टन सोने के लिए इश्यू प्राइस पर बकाया राशि ₹67,322 करोड़ है।" बताते चलें कि एसजीबी का रीडेम्पशन मौजूदा मार्केट प्राइस पर आधारित है।

सरकार के लिए सिरदर्द बना SGB, कुल देनदारी ₹1.2 लाख करोड़ के पार, ब्याज का खर्च अलग
AVP Ganga,लेखिका: साक्षी शर्मा, टीम नेटानागरी
परिचय
देश की वित्तीय स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है और सरकार के लिए सिरदर्द बन चुका है सॉवरेन गोल्ड बांड (SGB)। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, SGB पर कुल देनदारी ₹1.2 लाख करोड़ के पार पहुंच चुकी है। इस स्थिति ने नीति निर्माताओं को गंभीर चिंता में डाल दिया है।
क्या है SGB?
SGB एक निवेश साधन है जिसका उद्देश्य आम जनता को सोने में निवेश करने का एक सुरक्षित तरीका प्रदान करना है। इसमें निवेशक सरकार द्वारा जारी बांड खरीदते हैं, जिन्हें उनका मूल्य चुकाने पर सोने के रूप में पुनः भंग किया जाता है। लेकिन अब यह योजना सरकार के लिए एक नया निवेश सिरदर्द बन गई है।
वित्तीय स्थिति
स्रोतों के अनुसार, SGB की कुल देनदारी ₹1.2 लाख करोड़ से अधिक हो गई है। इसके ऊपर ब्याज का खर्च अलग है, जो फिलहाल सरकार के लिए एक वित्तीय बोझ बना हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने SGB की मांग को बढ़ाया है, लेकिन सरकार को इसके प्रति बढ़ते वित्तीय दायित्व पर भी विचार करना होगा।
ब्याज के खर्च का मुद्दा
सरकार को SGB पर हर साल ब्याज देना पड़ता है जो कि निवेशकों के लिए एक स्थायी लाभ के रूप में कार्य करता है। ये ब्याज दरें सरकार की वित्तीय नीति पर गंभीर दबाव बना सकती हैं। ऐसे में एक साथ बढ़ती ब्याज दरें और बढ़ती देनदारी सरकार के लिए वित्तीय सुरक्षा में कमी ला सकती हैं।
सम्भावित समाधान
सरकार को SGB के साथ अपने वित्तीय क्लाउड को सुलझाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। एक सुझाव यह है कि ब्याज दरों में सावधानी बरती जाए और नए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन दिए जाएं। इसके अलावा, अधिकतम साँप्सी प्रक्रिया को सरल बनाना और निवेश में पारदर्शिता को बढ़ाना आवश्यक है।
निष्कर्ष
सॉवरेन गोल्ड बांड (SGB) एक सुरक्षित निवेश विकल्प है, लेकिन अचानक बढ़ी हुई देनदारी और ब्याज का खर्च सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुका है। इसके समाधान के लिए ठोस और कारगर नीतियों की आवश्यकता है। जैसे ही सरकार इसे सही दिशा में ले जाने का कार्य करेगी, स्थिति में सुधार होगा। अधिक अपडेट के लिए, avpganga.com पर जाएं।
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