हरदा से सहानुभूति, लेकिन बोए पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए: महेंद्र भट्ट
देहरादून : उत्तराखंड में कांग्रेस की आंतरिक कलह पर भाजपा ने एक बार फिर तीखे प्रहार किए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस नेतृत्व और पार्टी की मौजूदा स्थिति पर कई बड़े बयान दिए। उन्होंने कहा कि 27 में जीत के सपने देखने वाली कांग्रेस की वास्तविकता आज प्रदेश की […] The post हरदा से सहानुभूति, लेकिन बोए पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए: महेंद्र भट्ट appeared first on Dainik Uttarakhand.
हरदा से सहानुभूति, लेकिन बोए पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए: महेंद्र भट्ट
देहरादून: उत्तराखंड में कांग्रेस की आंतरिक कलह पर भाजपा ने एक बार फिर तीखे प्रहार किए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस नेतृत्व और पार्टी की मौजूदा स्थिति पर कई बड़े बयान दिए। उन्होंने कहा कि 27 में जीत के सपने देखने वाली कांग्रेस की वास्तविकता आज प्रदेश की जनता साफ़ तौर पर देख रही है। भट्ट ने कांग्रेस की स्थिति को व्यंग्य करते हुए कहा कि अब कांग्रेस की हालत “सूत न कपास, जुलाहों में लट्ठम लट्ठा” जैसी हो चुकी है।
हरीश रावत पर कटाक्ष
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के 15 दिन के ‘मौन उपवास’ और अल्पकालीन ‘राजनीतिक संन्यास’ की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए महेंद्र भट्ट ने सहानुभूति तो जताई, लेकिन साथ ही कटाक्ष भी किया। उन्होंने कहा— “बोए पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय।” भट्ट ने आरोप लगाया कि हरीश रावत अब उन्हीं नेताओं की राजनीति का शिकार हो गए हैं, जिन्हें वह कभी ‘उज्याडू बेल’, ‘फुके कारतूस’ और ‘विष पुरुष’ कहा करते थे।
कांग्रेस में असंतोष और भगदड़ के आसार
महेंद्र भट्ट ने दावा किया कि कांग्रेस में असंतोष चरम पर है और निकट भविष्य में बड़ी भगदड़ के संकेत स्पष्ट दिख रहे हैं। उन्होंने कहा, “जितने लोग कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं, उससे कई गुना अधिक लोग पार्टी छोड़ने की कतार में खड़े हैं।” इस स्थिति के लिए उन्होंने कांग्रेस की सिद्धांतहीनता और नेतृत्वहीनता को जिम्मेदार ठहराया। भट्ट ने कहा कि कांग्रेस स्तर—चाहे प्रदेश हो या राष्ट्रीय—हरीश रावत जैसे वरिष्ठ नेता की बात सुनने को तैयार नहीं है, जिससे साफ़ होता है कि “कांग्रेस में उनकी अहमियत शून्य हो चुकी है।”
भविष्यहीन कांग्रेस का भट्ट का दावा
भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड में कांग्रेस पिछले 10 वर्षों से लगातार हार का सामना कर रही है और आगे भी उनकी जीत की कोई संभावना नहीं दिखती। उनका ये भी आरोप है कि कांग्रेस के नेता आपसी राजनीतिक संघर्ष में उलझे हैं, जबकि जनता की समस्याएँ पीछे छूट गई हैं। उन्होंने कहा— “कांग्रेस का भविष्य शून्यता की ओर बढ़ रहा है। पार्टी की स्थिति ‘सूत न कपास, जुलाहों में लट्ठम लट्ठा’ जैसी बन चुकी है।”
निष्कर्ष
महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई और नेतृत्व की कमी पर गहरा चिंतन किया है। उनका मानना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए कांग्रेस को आत्ममंथन करना होगा। भाजपा के हमले और हरीश रावत की स्थिति को देखते हुए लगता है कि कांग्रेस को अपनी रणनीतियों में बदलाव करने की आवश्यकता है। यह न केवल पार्टी की जिम्मेदारी है, बल्कि उत्तराखंड की जनता के प्रति उसकी जवाबदेही भी है।
यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड में भाजपा के आगे कांग्रेस की चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं, और आने वाले समय में इस राजनीतिक माहौल में कई परिवर्तन संभव हैं।
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लेखक: नेहा शर्मा, साक्षी रावत, टाइम्स गंगानुमा
टीम: avpganga
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