पश्चिम बंगाल में संदेशखाली के बोयरमारी गांव में TMC कार्यकर्ता को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर शुक्रवार रात भीड़ ने हमला कर दिया। हमले में छह पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस वाहन में भी तोड़फोड़ की गई। पुलिस के अनुसारन पुलिस टीम TMCकार्यकर्ता मूसा मोल्ला को गिरफ्तार करने गई थी। उस पर अवैध रूप से जमीन और तालाब पर कब्जा कर मछली पालन करने का आरोप है। जब पुलिसकर्मी मोल्ला को उसके घर से पकड़कर पुलिस वाहन में बैठाने की कोशिश कर रहे थे, तभी मोल्ला के समर्थकों ने वाहन को घेर लिया और तोड़फोड़ कर पत्थरबाजी की। हमले में एक अधिकारी सहित छह पुलिसकर्मी घायल हो गए। अफरातफरी का फायदा उठाकर मूसा मोल्ला मौके से फरार हो गया। गांव में अतिरिक्त बल तैनात वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस टीम पर हमले के बाद इलाके में अतिरिक्त बल भेजा गया।हमला करने के आरोप में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हिंसा भड़काने के आरोप में दो स्थानीय टीएमसी नेताओं बोयरमारी ग्राम पंचायत-2 के प्रधान और उप-प्रधान को भी हिरासत में लिया है। मूसा मोल्ला अभी फरार है। आसपास के घरों में छापेमारी की गई और अन्य आरोपियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। एहतियात के तौर पर अतिरिक्त बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में है। भाजपा बोली- हमला TMC कार्यकर्ताओं का बेखौफ रवैया भाजपा नेता सजल घोष ने कहा कि हमला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार में TMC कार्यकर्ताओं की हताशा और बेखौफ रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा, पहले केंद्रीय एजेंसियों पर हमले हुए और अब राज्य पुलिस पर पैटर्न वही है। TMC प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने हमले की निंदनीय बताते हुए कहा कि पार्टी ऐसे कृत्यों का समर्थन नहीं करती।उन्होंने कहा, पुलिस अपना कर्तव्य निभा रही है और वह जो भी कार्रवाई करेगी, उसे हमारा समर्थन रहेगा,साथ ही विपक्ष पर इस घटना का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। दो साल पहले ED टीम पर हमला हुआ था इस झड़प ने जनवरी 2024 की उस घटना की याद दिला दी, जब कथित राशन वितरण घोटाले के सिलसिले में सस्पेंड TMC नेता शेख शाहजहां के घर पर छापे के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पर संदेशखाली में हमला हुआ था। उस हमले में कई ED अफसर घायल हो गए थे और टीम को पीछे हटना पड़ा था। शेख शाहजहां को बाद में CBI ने गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल जेल में है। उसके खिलाफ कई मुकदमे चल रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान संदेशखाली पश्चिम बंगाल की राजनीति में दबंगई और प्रशासनिक विफलता के प्रतीक के रूप में उभरा था। 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं और शुक्रवार की घटना ने एक बार फिर इस इलाके को कानून-व्यवस्था और राजनीतिक टकराव का केंद्र बना दिया है, जिससे सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है।