12 तेंदुए निकले बेगुनाह :  पिजरों से किए बाइज्जत बरी, दो का फैसला होना शेष, आदमखोर कौन

Clean Chit To Leopards : आदमखोर होने के आरोप में लोहे के पिंजरों में कैद किए गए 12 तेंदुए विभागीय जांच में बेगुनाह साबित हुए हैं। बता दें कि उत्तराखंड में वन्यजीवों का आतंक छाया हुआ है। आए दिन यहां तेंदुए या बाघ लोगों को निवाला बना रहे हैं। पिछले कुछ सालों के भीतर तेंदुए और बाघ राज्य में सैकड़ों लोगों को निवाला बना चुके हैं। ऐसी घटनाएं सामने आने पर वन विभाग संबंधित क्षेत्रों में ट्रैप कैमरे और पिंजरे लगाकर आदमखोर वन्यजीवों को कैद करता रहता है। पहाड़ों में गुलदारों की दहशत पिछले कुछ समय से काफी बढ़ गई है। पकड़े गए तेंदुओं को वन विभाग अल्मोड़ा के एनटीडी स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजता  है। पिछले साल वन विभाग ने आदमखोर समझकर 14 तेंदुए पकड़ कर उन्हें अल्मोड़ा के रेस्क्यू सेंटर में रखा था। उसके बाद तेंदुओं के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए थे। लैब की रिपोर्ट के अनुसार विभन्न क्षेत्रों से पकड़े गए 12 तेंदुए आदमखोर नहीं हैं। लिहाजा वन विभाग ने 12 तेंदुओं को दोषमुक्त करते हुए वापस जंगलों में छोड़ दिया है। बड़ा सवाल  ये है कि असल आदमखोर तेंदुए कहां हैं।  इधर, मृग विहार रेस्क्यू सेंटर के रेंजर किशोर गोस्वामी के मुताबिक पिछले एक साल में कुल 14 गुलदार रेस्क्यू किए गए हैं। जांच में आदमखोर नहीं पाए जाने पर 12 गुलदारों को छोड़ दिया गया है। दो गुलदारों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

Apr 19, 2026 - 09:33
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12 तेंदुए निकले बेगुनाह :  पिजरों से किए बाइज्जत बरी, दो का फैसला होना शेष, आदमखोर कौन
12 तेंदुए निकले बेगुनाह :  पिजरों से किए बाइज्जत बरी, दो का फैसला होना शेष, आदमखोर कौन

12 तेंदुए निकले बेगुनाह : पिजरों से किए बाइज्जत बरी, दो का फैसला होना शेष, आदमखोर कौन

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राष्ट्र के बाघों और तेंदुओं के संरक्षण के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं। हाल ही में उत्तराखंड राज्य के वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके तहत आदमखोर होने के आरोप में लोहे के पिंजरों में कैद किए गए 12 तेंदुए अब बेगुनाह साबित हुए हैं।

हालात की गंभीरता

उत्तराखंड में वन्यजीवों के आतंक के कारण राज्य भर में लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में तेंदुए और बाघ सैकड़ों लोगों को अपनी चपेट में ले चुके हैं। ऐसे में वन विभाग इन आदमखोर वन्यजीवों का शिकार करने के लिए ट्रैप कैमरे और पिजरे लगाने का काम करता रहता है। पहाड़ों में तेंदुओं का आतंक जारी है, और इसी के चलते इन 12 तेंदुओं को शरण दी गई थी।

जांच की प्रक्रिया

पिछले साल वन विभाग ने 14 तेंदुओं को आदमखोर समझकर अल्मोड़ा के एनटीडी स्थित रेस्क्यू सेंटर में कैद किया था। इन तेंदुओं के सैंपलों की जांच के लिए लैब भेजा गया, जहां से प्राप्त रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया। जांच में पाया गया कि ये 12 तेंदुए आदमखोर नहीं हैं। इसके बाद वन विभाग ने इन्हें बाइज्जत बरी कर दिया और फिर से जंगलों में छोड़ दिया गया।

अर्मान और सवाल

बड़े सवाल ये उठते हैं कि असल में आदमखोर तेंदुए कौन हैं? रेस्क्यू सेंटर के रेंजर किशोर गोस्वामी ने बताया कि पिछ一年 में कुल 14 तेंदुओं को रेस्क्यू किया गया था, लेकिन सिर्फ 12 ही बेगुनाह साबित हुए हैं। दो तेंदुओं की रिपोर्ट का अभी भी इंतजार किया जा रहा है।

इस घटना के बाद, वन विभाग के अधिकारियों ने सुरक्षा उपायों को और बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। बढ़ती मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। इस संदर्भ में हमें यह भी याद रखना चाहिए कि प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए इन वन्य जीवों की सुरक्षा आवश्यक है।

आगे का रास्ता

वन विभाग को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि आगे से इस प्रकार की घटनाएं न हों। इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय समुदाय के साथ काम करना जरूरी है। ऐसे मामलों में, स्थानीय लोगों को भी वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाना होगा। वन्यजीवों के प्रति सम्मान और सुरक्षा का भाव रखना आवश्यक है।

जहां एक और ये तेंदुए अपने जंगलों में सुरक्षित लौट आए हैं, वहीं दूसरी ओर वास्तविक खतरे का सामना करने के लिए हमें सजग रहना होगा। आंतरिक इस मामले में जानकारी के लिए, कृपया [यहां क्लिक करें](https://avpganga.com)।

निष्कर्ष

इस पूरे घटनाक्रम ने हमें अवश्य सोचने पर मजबूर किया है कि यदि वन्यजीवों का संरक्षण ही हमारे लिए प्राथमिकता नहीं बनेगा, तो आगे की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। हमें मिलकर इन जीवों की सुरक्षा के साथ-साथ अपने जीवन की सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा।

लेखिका: साक्षी शर्मा
टीम avpganga

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leopards, Uttarakhand wildlife, human-wildlife conflict, animal rescue, leopard release, wildlife safety, forest department, clean chit, animal behavior, tiger and leopard attacks

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